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10.07. वैदिक बीजगणित (7) | बीजगणितीय शब्दावली | (भाग 4)

107. वैदिक बीजगणित (7) | बीजगणितीय शब्दावली | (भाग 4)   चरण 1 बहुपद :-  वह व्यंजक जिसके गुणज शन्येत्तर (शून्य न हो) तथा घातें ऋणेत्तर (ऋण न हो) बहुपद कहलाता है। जैसे ax² + bx + c , x + y + 2, z – a + b, 2x + xy + z, a + b² + c, a + 2 + x, z – 2 – y, xy + yz – zx, abc +…

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