लेख 3 | प्राचीन भारतीय गणित का विस्तार तथा मौलिक उपयोग

प्राचीन भारतीय गणित का विस्तार तथा मौलिक उपयोग गणित में मौलिक संख्याओं के द्वारा वस्तुओं की गणना की संक्रिया के पश्चात् हर युग में उसका विस्तार होता रहा। पिछले परिच्छेद में कहा है कि उँगलियों को गिनने के लिये संख्याओं के मौलिक शब्द एक से दस तक ही हैं। इसके पश्चात् की अ…

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लेख 02 | वैदिक गणित की नियम, विशेषतायें एवं तीन का नियम (क्रम त्रैराशिकऔर व्यस्त त्रैराशिक नियम नियम)

वैदिक गणित की नियम, विशेषतायें एवं तीन का नियम (क्रम त्रैराशिकऔर व्यस्त त्रैराशिक नियम नियम) वैदिक गणित का सामान्य परिचय गणितशास्त्र भारत के प्राचीनतम शास्त्रों में से एक है। गणित शास्त्र का प्रयोग सार्वभौमिक और सार्वकालिक है। कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार प्राचीन क…

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लेख 01 | वेदों में 1 से 10 तक की गणना किस प्रकार की गई है ?

वेदों में 1 से 10 तक की गणना किस प्रकार की गई है ? यथा शिखा मयूराणां नागानां मणयो यथा।  तद्वद् वेदांगशास्त्राणां गणितं मूर्धिन स्थितम् ।। जैसे मोर की कलंगी तथा नागों की मणियाँ उनके मस्तक पर विराजमान होती हैं, उसी प्रकार गणित सभी वेदांग शास्त्रों में सर्वोच्च शीर्ष पर व…

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त्रिकोणमिति / Trigonometry

संपूर्ण त्रिकोणमिति फार्मूला के साथ✍️✅ Chapter No - 10 ( त्रिकोणमिति ) Trigonometry������������������������������������������������������������������������������������������������������������������������������������������������������������������������������������������…

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मैथ्स स्पेशल 1 (समय, दूरी व चल से संबंधित)

मैथ्स स्पेशल 1 (समय, दूरी व चल से संबंधित) चाल किसी पिण्ड द्वारा इकाई समय में तय की गयी दूरी को चाल कहते हैं। चाल का मात्रक मी/से या किमी/घण्टा होता है। चाल = दूरी / समय दूरी किसी पिण्ड द्वारा स्थान परिवर्तन को उस पिण्ड द्वारा तय की गयी दूरी कहा जाता है। दूरी = चालू × …

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भिन्न 3/5 को ध्यान में रखते हुए निम्न के उत्तर दो

भिन्न 3/5 को ध्यान में रखते हुए निम्न के उत्तर दो 01. सम भिन्न / विषम भिन्न 02. अंश = ......     हर = ...... 03. मान 1 से ज्यादा है या कम  04. इस भिन्न का दशमलव मान = 05. इस भिन्न का प्रतिशत मान  = 06. इस भिन्न की 1/5 के साथ तुलना = 07. इस भिन्न की  2/7 के साथ तुलना = …

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शून्य_की_खोज

#खंडन -- #शून्य_की_खोज -- पिछली पोस्ट में कौरवों के विषय मे खण्डन करने पे कुछ मित्रो के सवाल इनबॉक्स में आये वही पुराने -  की जब शून्य की खोज सन् 498 में भारतीय गणितज्ञ एवं खगोलवेत्ता आर्यभट्ट ने किया । तो उनके पहले से कौरव के 100 होने या रावण के 10 सर होने…

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