वैदिक शिशु गणित 01 || प्रथम पुस्तक || Ch. 00 पाठ्यक्रम || (K.G., 1st & 2nd)

शिशु प्रथम :-

1. सूत्र - अवलोकनम् अथवा विलोकनम, एकाधिकेन व एकाधिकेन पूर्वेण, एकन्यूनेन पूर्वेण । 

1. सामान्य गिनती, उल्टी गिनती व शून्य की कल्पना ।

2. अंकों की पहचान-समानता व असमानता के कारण, भ्रम एवं निवारण । (विभिन्न साधनों के कटआउट, अंगुली घुमाना, रेत अथवा मिट्टी पर लिखना आदि ) 

3. बड़ा-छोटा, लंबा-नाटा, थोड़ा अधिक, मोटा-पतला, दूर-पास । (विभिन्न साधनों से)

4. आगे-पीछे, पहले - बाद में, अंदर बाहर की कल्पना ( विभिन्न साधनों से )

5. संख्यांक - पहला, दूसरा आदि (विभिन्न साधनों से )

6. परम मित्र कल्पना (1 का 9, 2 का 8, 3 का 7, 4 का 6, 5
का 5, ये परस्पर परम मित्र हैं एवं पूरक अंक हैं। ) 7. समय का ज्ञान - प्रातः, दोपहर, सायं, रात्रि |

8. मासों के नाम, दिनों के नाम

9. आकृतियों की पहचान धीरे-धीरे अंकों की आकृति तक पहुंचना । 

10. वैदिक सूत्र याद करना ।

11. एक-एक कंकड़ लेकर एकन्यूनेन पूर्वेण कराते हुए शून्य तक ले जाना एवं शून्य के चिह्न की प्राथमिक जानकारी । सारे क्रिया-कलाप गीत, कहानी व खेल के माध्यम से करना ।

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